भाखड़ा बांध का जलस्तर बढ़ने से बीबीएमबी अलर्ट, हरियाणा-पंजाब समेत राज्यों को अधिक पानी उपयोग करने की सलाह
- By Gaurav --
- Friday, 12 Jun, 2026
BBMB Advises States to Use
उत्तरी भारत में हाल के दिनों में हुई बेमौसमी बारिश और पहाड़ी क्षेत्रों से बढ़ी जल आवक के चलते भाखड़ा बांध का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। स्थिति को देखते हुए Bhakra Beas Management Board ने हरियाणा, पंजाब, राजस्थान समेत सभी हिस्सेदार राज्यों को अपने निर्धारित हिस्से का पानी अधिक से अधिक उपयोग करने की सलाह दी है, ताकि मानसून के दौरान संभावित बाढ़ के खतरे को कम किया जा सके।
बीबीएमबी के अनुसार भाखड़ा बांध का जलस्तर वर्तमान में 1,578.07 फीट तक पहुंच गया है, जो पिछले वर्ष की समान अवधि की तुलना में करीब 21.47 फीट अधिक है। मौसम विभाग के अनुमान के मुताबिक जून के अंतिम सप्ताह या जुलाई के पहले सप्ताह में उत्तर भारत में मानसून सक्रिय हो सकता है। ऐसे में जलाशय में पर्याप्त खाली क्षमता बनाए रखना आवश्यक हो गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के दौरान भारी वर्षा और पहाड़ों से बर्फ पिघलने के कारण जल आवक और बढ़ सकती है। ऐसी स्थिति में Gobind Sagar Lake पर दबाव बढ़ने की आशंका है, जिससे निचले इलाकों में बाढ़ का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इसी संभावना को देखते हुए बीबीएमबी पहले से ही जल प्रबंधन की रणनीति पर काम कर रहा है।
धान की रोपाई का सीजन शुरू होने के कारण बोर्ड ने विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा को अपने कोटे का अधिकतम उपयोग करने की सलाह दी है। जानकारी के अनुसार पंजाब सरकार अतिरिक्त पानी की मांग भी बोर्ड को भेज चुकी है, जबकि अन्य राज्यों से भी आवश्यकता अनुसार जल उपयोग बढ़ाने को कहा गया है।
जल वितरण व्यवस्था के तहत पंजाब को 5.512 मिलियन एकड़ फुट (एमएएफ), हरियाणा को 2.987 एमएएफ और राजस्थान को 3.318 एमएएफ पानी आवंटित किया जाता है। यह वितरण चक्र प्रत्येक वर्ष 21 मई से शुरू होकर अगले वर्ष 20 मई तक जारी रहता है।
गौरतलब है कि पिछले वर्ष अतिरिक्त पानी के मुद्दे को लेकर पंजाब और हरियाणा के बीच विवाद भी सामने आया था, जो राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर से आगे बढ़कर न्यायालय तक पहुंच गया था। हालांकि इस बार जल उपलब्धता अपेक्षाकृत बेहतर होने के कारण फिलहाल स्थिति नियंत्रण में बताई जा रही है।
बीबीएमबी का कहना है कि हर वर्ष मानसून की स्थिति, बांधों में जल आवक और उपलब्ध भंडारण क्षमता का आकलन कर जल प्रबंधन की रणनीति तैयार की जाती है। वर्तमान में बोर्ड का मुख्य उद्देश्य मानसून से पहले जलाशय में पर्याप्त भंडारण क्षमता बनाए रखना और संभावित बाढ़ जोखिम को न्यूनतम करना है।